इंदिरा सिर्फ एक नाम ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व में पहचाना जाने वाला शक्ति का एक प्रतीक है। अपने अदम्य साहस और निर्भीक छवि से भारत की इस महिला प्रधानमंत्री ने पूरी दुनिया पर एक अमिट छाप छोड़ी है....... हिन्दुस्तान को सिर्फ एक ऐसे ही साहसी व्यक्तित्व की आवश्यकता है जो अपने त्वरित निर्णयों से देश को आगे बढाने का काम कर सके।
वर्तमान परिपेक्ष्य में जिस तरह की कार्यप्रणाली उपयोग में ली जा रही है उससे देश के विकास की गति कही न कही बाधित हो रही है। निर्णय लेने की क्षमता का अभाव एवं उसके क्रियान्वयन के तरीके की वजह से आज भी वास्तविक और आधारभूत कार्यों को मूर्तरूप नहीं दिया जा पा रहा है, यही एक वजह है जिसके चलते देश आज भी लगातार कई तरह की समस्याओं.........अशिक्षा, गरीबी, भुखमरी, आतंकवाद, भ्रष्टाचार, आंतरिक कलह आदि से जूझ रहा है.........
मेरा मानना है की इंदिरा जैसा व्यक्तित्व ही देश को ऐसी समस्याओं से निजात दिला सकता है, जिन्होंने, चाहे वह बांग्लादेश का मसला हो, चाहे चीन और पाकिस्तान का मसला हो या फिर देश की आंतरिक शक्ति और सुरक्षा से सम्बंधित मसला हो, इन सभी पर जिस कूटनीति और सूझबूझ से निर्णय लेकर जो काम किये उन्हें हम आज भी नहीं भुला सकते।
आज ही के दिन 31 अक्टूबर को अपना फर्ज निभाते हुए इंदिरा गांधी देश के लिए कुर्बान हो गई। महिला शक्ति के रूप में पहचानी जाने वाली इंदिरा जी की पुण्यतिथि पर हमारी सच्ची श्रद्धांजलि उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लेकर ही दी जा सकती है.....
जब तक सूरज चाँद रहेगा, इंदिरा जी का नाम रहेगा........
जय हिंद......
वर्तमान परिपेक्ष्य में जिस तरह की कार्यप्रणाली उपयोग में ली जा रही है उससे देश के विकास की गति कही न कही बाधित हो रही है। निर्णय लेने की क्षमता का अभाव एवं उसके क्रियान्वयन के तरीके की वजह से आज भी वास्तविक और आधारभूत कार्यों को मूर्तरूप नहीं दिया जा पा रहा है, यही एक वजह है जिसके चलते देश आज भी लगातार कई तरह की समस्याओं.........अशिक्षा, गरीबी, भुखमरी, आतंकवाद, भ्रष्टाचार, आंतरिक कलह आदि से जूझ रहा है.........
मेरा मानना है की इंदिरा जैसा व्यक्तित्व ही देश को ऐसी समस्याओं से निजात दिला सकता है, जिन्होंने, चाहे वह बांग्लादेश का मसला हो, चाहे चीन और पाकिस्तान का मसला हो या फिर देश की आंतरिक शक्ति और सुरक्षा से सम्बंधित मसला हो, इन सभी पर जिस कूटनीति और सूझबूझ से निर्णय लेकर जो काम किये उन्हें हम आज भी नहीं भुला सकते।
आज ही के दिन 31 अक्टूबर को अपना फर्ज निभाते हुए इंदिरा गांधी देश के लिए कुर्बान हो गई। महिला शक्ति के रूप में पहचानी जाने वाली इंदिरा जी की पुण्यतिथि पर हमारी सच्ची श्रद्धांजलि उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लेकर ही दी जा सकती है.....
जब तक सूरज चाँद रहेगा, इंदिरा जी का नाम रहेगा........
जय हिंद......


