आज सुबह के अखबार की एक हेडलाइन ने मेरे अंतर्मन को झंझोर कर रख दिया। मेरे प्रदेश में हुई एक घटना ने मानवता को शर्मसार कर दिया.................
खबर कुछ इस तरह है की कानून के रखवालों ने 75 साल के एक बुजुर्ग को दोनों हाथ बाँध कर पेड़ पर लटका दिया................ राज उगलवाने का कितना निराला अंदाज है पुलिस का.................................!! क्या इस तरह के अमानवीय कृत्य को बर्दाश्त किया जाना चाहिए?
उस पुलिसवाले को निलंबित करके अधिकारियों ने खानापूर्ति तो कर ली, लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आता की इन लोगो के मन में ऐसा नहीं करने का भय क्यों नहीं उत्पन्न होता? जहाँ तक मुझे लगता है इस तरह की खानापूर्ति से इनका कुछ नहीं बिगड़ता तभी तो ऐसी घटनाएं बार-बार दोहराई जाती हैं। कानून के रखवाले न्यायपालिका का काम भी खुद ही कर लेते हैं...................! इस बुजुर्ग के ऊपर चोरी का आरोप है और इसका राज उगलवाने के लिए उन्होंने क्या तरीका अपनाया है...! धन्य है ऐसी पुलिसिया सोच................
दूसरी तरफ मेरे हिंदुस्तान का मुजरिम कसाब, जिसने सरेआम लाशें बिछा दी उसकी तीमारदारी में क़ानून के रखवालों ने करोडो रुपये खर्च करवा दिए और उसकी सजा मुक़र्रर करने में इतना समय गवां दिया माना की ये सब एक प्रक्रिया के तहत ही होना था................... तो इस बुजुर्ग के मामले में ये तरीका क्यों अपनाया गया। ऐसे और भी काफी उदाहरण हैं और आप सभी उनके बारे में जानते हैं?
ऐसे अमानवीय कृत्य हों और हम चुपचाप बर्दाश्त कर लें...............?
कब तक चुप बैठें................?
क़ानून के रखवालों के हाथों कानून की धज्जियां कब तक उड़ते देखें..............?
अगर इस तरह के अमानवीय कृत्यों पर हम चुपचाप बैठे रहे तो हमारा कोई धनीधोरी नहीं है...........
Friday, June 11, 2010
यूं रोकेंगे अपराध............!
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well said, i cant understand our law, itna majboot hote hue bhi kamjor dikhayi padta hai.....
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