Thursday, February 21, 2013

आतंकी हमले....



भारत के राज्य आन्ध्र प्रदेश की राजधानी, भाग्यनगर,हैदराबाद, भारत के सर्वाधिक विकसित नगरों मे से एक और भारत में सूचना प्रौधोगिकी एवं जैव प्रौद्यौगिकी का केन्द्र के दिलसुखनगर में  गुरूवार शाम  सिलेसिलेवार धमाकों से जो जानें चली गई हैं और जितने लोग घायल हुए हैं उन सब के लिए आप और हम दुःख व्यक्त करने के सिवाय कुछ नहीं कर सकते, आपकी और हमारी संवेदनाएं हादसे में पीड़ित लोगों के लिए पूरी तरह समर्पित हैं, लेकिन क्या हम उनकी पीड़ा दूर कर सकते हैं.....?

देश में लगातार आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दिया जाता रहा है, इसके बावजूद चाहे वो सरकार हो, या हम सब आम आदमी, अपनी जिम्मेदारी ढंग से नहीं निभा पा रहे हैं और इसी लिए कोई भी ऐसी घटनाओं को आकर अंजाम दे जाता है......

मैं भी यही मानता हूँ की आम जन की और हमारी सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है लेकिन साथ ही साथ इस व्यवस्था का एक अंग होने के नाते हमारी भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं क्या जा सकता, मेरे शहर जयपुर में भी ऐसे ही धमाकों की वजह से 80 लोग मारे गए थे और जहां-जहां ये घटना घटी वहां आज भी कोई भी अनजान आदमी जाकर फिर ऐसी ही किसी भी घटना को अंजाम दे सकता है क्योंकि हम सचेत नहीं हैं, जितनी जिम्मेदारी सरकार की है उतनी ही जिम्मेदारी हमारी भी है.

पिछले वर्षों में देश में आए दिन होने वाले सिलसिलेवार बम धमाके.... आए दिन मिलने वाली आतंकी धमकियां.... दहशतगर्दी के साए में जीते लोग.....


आखिर कब तक इस तरह निर्दोष लोग मौत के साए में समाते रहेंगे......?
कब तक हम आतंकी हमलों की बरसी मनाते रहेंगे......?
आखिर कब तक आतंककारी इस देश को अपनी सैरगाह बनाए रखेंगे.......?

कब तक हम सुरक्षा एजेंसियों के भरोसे अपनी नाक के नीचे इस तरह की गतिविधियों को अंजाम होते देखते रहेंगे.....?

सुरक्षा व्यवस्था अपनी जिम्मेदारी मुस्तैदी से निभाएं इसके लिए हर संभव उपाय होने चाहियें लेकिन एक तथ्य जो पूर्णतया सत्य है, जैसे हम अपने घर की सुरक्षा करते हैं उसी तरह कम से कम अपने आस-पास,यदि हम कही बाहर हैं तो अपने संपर्क में आने वालों की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं.......हर संदिग्ध गतिविधि पर हमें गौर करना होगा, हमारी जागरूकता से देश के प्रति बुरी नीयत रखने वालों के हौसले पस्त होने लगेंगे....

जब हम चौकस रहने लगेंगे,अपनी और अपनों की सुरक्षा से ऊपर उठकर जब हम देश की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील होंगे तो देश को नुकसान पहुचाने वाला 100 बार सोचेगा..... हमारी मुस्तैद और सजग प्रहरी के रूप में भूमिका देश को आसान शिकार समझने वालों पर लगाम कसेगी......

Saturday, November 17, 2012

युवाओं को क्या सिखा रही है देश की दूसरी सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी ????



पिछले दिनों दीपावली से ठीक पहले शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर बीजेपी युवा मोर्चा के निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने नगर-निगम पर एक प्रदर्शन किया ! जाहिर सी बात है की प्रदर्शन में युवा शक्ति थी, और जब ये एकत्रित हो जाती है तो इसके जोश में होश रहने की सम्भावना कम ही रहती है ! 

मेरा मानना है की ऐसे में नेतृत्त्व किसी समझदार और जिम्मेदार व्यक्ति को ही करना चाहिए अन्यथा इस शक्ति के अनियंत्रित होकर बिखरने का डर रहता है और वही हुआ, प्रदर्शनकारियों ने जोश में होश खो दिया और निगम कार्यालय में जमकर तोड़-फोड़ करने के साथ ही सारी मर्यादाओं को पार करते हुए निगम के सी ई ओ पर कचरा फेंका, ये पूरा नजारा चैनल्स और मीडिया के द्वारा सभी ने देखा ! पुलिस द्वारा बाद में 12 कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया !
अब आप देखिये ताज्जुब इस बात का है की पार्टी के बड़े नेताओं ने अमर्यादित और अशोभनीय घटना की निंदा करने की बजाय कार्यकर्ताओ को छुड़ाने के लिए थाने में ही धरना दिया .....

इन सभी लोगो को जब जेल भेज दिया गया तो पार्टी के बड़े बड़े नेताओं सहित पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे खुद उनसे मिलने गयी जैसे कोई बहुत बड़ा काम इन लोगो ने कर दिया हो .....

हद तो तब हो गयी जब इन्हें जमानत मिली तो जेल से बहार आते ही इनका बड़ा स्वागत किया गया और विजय-जुलुस की तरह रैली के रूप में बीजेपी कार्यालय लाया गया और वह आतिशबाजी की गयी जैसे कोई बड़ी जंग जीतकर आये हो ..... 

अब आप ही सोचिये !!!

कभी सम्प्रदाय ने नाम पर....., 
कभी राम के नाम पर ...., 
कभी गौमाता के नाम पर ....,

और अब युवाओं को अमर्यादित आचरण पर प्रोत्साहन देकर ....
इस देश को क्या देना चाहती है बीजेपी .... ???????????????
जय हिन्द !

Monday, March 26, 2012

बजट 2012 -13 युवाओं के नाम...

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट 2012 -13 युवाओं के नाम कर दिया है....इस बजट में सबसे ज्यादा प्रदेश के युवाओं को ध्यान में रखते हुए ही घोषणाएं की गई हैं। 20000 शिक्षक और 10000 पुलिसकर्मियों की भर्ती..., विद्यार्थी मित्रों के मानदेय में 25% बढ़ोतरी..., IIT व IIM में गरीब छात्रों के लिए 1 लाख की फीस पर 50000 की छूट..., नए पुस्तकालय..., RPSC , IIT, PMT व PET के लिए कोचिंग सेंटर..., एससी छात्राओं के लिए नए होस्टल..., इंजीयनियरिंग कॉलेज में इंग्लिश लेंग्वेज लेब..., Govt. कॉलेज में इंग्लिश बुक लाइब्रेरी ..., नए खेल संकुल और स्टेडियम, कबड्डी, नौकायन और बास्केटबाल एकेडमी..., जयपुर में जर्नलिज्म यूनिवर्सिटी दी जा रही हैं.... साथ ही साथ मुख्यमंत्री ने प्रदेश के खिलाड़ियों को बहुत बड़ी सौगात देते हुए प्रथम स्थान पर आने वाले या विशेष पदक जीतने वाले खिलाड़ी की प्रोत्साहन राशि 50000 से बढ़ाकर सीधे 5 लाख कर दी है....
आम जन को राहत देने के साथ-साथ मुख्यमंत्री का ये बजट पूर्णतया प्रदेश के युवाओं को समर्पित है इसके लिए अशोक गहलोत जी का बहुत बहुत धन्यवाद और आभार.....
जय युवा...
जय भारत...

Thursday, July 28, 2011

काबलियत और आत्मसम्मान...


साथियों अब कुछ करना होगा........
मेरे प्रदेश राजस्थान के एक शहर उदयपुर की एक रिपोर्ट ने मुझे बेहद व्यथित और चिंतित कर दिया और जहां तक मैं सोचता हूँ, इस जानकारी के बाद आप और सभी युवा साथी भी चिंतित हो जाएँगे।

लाइव इंडिया के राजस्थान ब्यूरो चीफ़ राजेश असनानी की एक रिपोर्ट के अनुसार उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में चपरासी की 15 वेकेंसीज निकाली गई जिनका काम एक टेबल से दूसरे टेबल पर फाइलें ले जाना, आने-जाने वाले लोगों को पानी पिलाना और अन्दर बैठे साहब के हुक्म की तामील करना है..... आप सब को यह जानकार आश्चर्य होगा कि इन 15 पदों के लिए लगभग 3500 आवेदन प्राप्त हुए हैं जिनमें से 50 आवेदन उच्च शिक्षा प्राप्त एमबीए, एमफिल, पीएचडी किए हुए छात्रों के मिले हैं.....

हमारे लिए यह एक अलार्मिंग सिचुएशन है कि इतनी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी हमारे युवा साथी चपरासी की नौकरी के लिए आवेदन कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कोर्पोरेट सेक्टर में बढ़ता हुआ शोषण, सरकारी जॉब सीक्योरिटी, बढा हुआ छठा वेतनमान और भविष्य में मिलने वाले promotions और pension को आवेदन का कारण बताया।

मैं ये जानना चाहता हूँ कि इतनी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी अगर हमें चपरासी के पद पर नौकरी मिलती है तो क्या हम शिक्षा और उस पद के प्रति न्याय कर पाएंगे......?
क्या सम्बंधित अधिकारी जिसके कि हम चपरासी बनेंगे वो हमें चपरासी समझ पाएगा.....?
यदि नहीं तो अपने आत्मसम्मान के साथ अन्याय क्यों......?
साथियों कब तक हम सरकारी नौकरी के भरोसे रहेंगे और अपनी शिक्षा और आत्मसम्मान के साथ समझौता करेंगे......?

अपनी क्षमता और काबिलियत को ध्यान में रखते हुए हमें खुद को पहल करते हुए अवसर उत्पन्न करने होंगे जिनसे कि और लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करवाए जा सकें।

मैं मानता हूँ कि हम सभी टाटा, बिडला या अम्बानी जैसे और भी बड़े घरानों से नहीं हैं लेकिन पूँजी ही सब कुछ हो ऐसा नहीं है........ हमें शुरुआत करनी पड़ेगी, अपने comfort zone से बाहर आना होगा और रिस्क उठानी होगी ताकि हम अपने साथ-साथ अपने साथियों के लिए और आने वाले कल के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकें......
जय युवा...
जय भारत...









Thursday, July 14, 2011

आतंकी हमले....

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई जहां बीते दिन लगातार हुए धमाकों से जो जानें चली गई हैं और जितने लोग घायल हुए हैं उन सब के लिए आप और हम दुःख व्यक्त करने के सिवाय कुछ नहीं कर सकते, आपकी और हमारी संवेदनाएं हादसे में पीड़ित लोगों के लिए पूरी तरह समर्पित हैं, लेकिन क्या हम उनकी पीड़ा दूर कर सकते हैं.....?

देश में लगातार आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है, इसके बावजूद चाहे वो सरकार हो, या हम सब आम आदमी, अपनी जिम्मेदारी ढंग से नहीं निभा पा रहे हैं और इसी लिए कोई भी ऐसी घटनाओं को आकर अंजाम दे जाता है......

मैं भी यही मानता हूँ की आम जन की और हमारी सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है लेकिन साथ ही साथ इस व्यवस्था का एक अंग होने के नाते हमारी भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं क्या जा सकता, मेरे शहर जयपुर में भी ऐसे ही धमाकों की वजह से 80 लोग मारे गए थे और जहां-जहां ये घटना घटी वहां आज भी कोई भी अनजान आदमी जाकर फिर ऐसी ही किसी भी घटना को अंजाम दे सकता है क्योंकि हम सचेत नहीं हैं, जितनी जिम्मेदारी सरकार की है उतनी ही जिम्मेदारी हमारी भी है.

पिछले वर्षों में देश में आए दिन होने वाले सिलसिलेवार बम धमाके.... आए दिन मिलने वाली आतंकी धमकियां.... दहशतगर्दी के साए में जीते लोग.....



आखिर कब तक इस तरह निर्दोष लोग मौत के साए में समाते रहेंगे......?
कब तक हम आतंकी हमलों की बरसी मनाते रहेंगे......?
आखिर कब तक आतंककारी इस देश को अपनी सैरगाह बनाए रखेंगे.......?



कब तक हम सुरक्षा एजेंसियों के भरोसे अपनी नाक के नीचे इस तरह की गतिविधियों को अंजाम होते देखते रहेंगे.....?

सुरक्षा व्यवस्था अपनी जिम्मेदारी मुस्तैदी से निभाएं इसके लिए हर संभव उपाय होने चाहियें लेकिन एक तथ्य जो पूर्णतया सत्य है, जैसे हम अपने घर की सुरक्षा करते हैं उसी तरह कम से कम अपने आस-पास,यदि हम कही बाहर हैं तो अपने संपर्क में आने वालों की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं.......हर संदिग्ध गतिविधि पर हमें गौर करना होगा, हमारी जागरूकता से देश के प्रति बुरी नीयत रखने वालों के हौसले पस्त होने लगेंगे....

जब हम चौकस रहने लगेंगे,अपनी और अपनों की सुरक्षा से ऊपर उठकर जब हम देश की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील होंगे तो देश को नुकसान पहुचाने वाला 100 बार सोचेगा..... हमारी मुस्तैद और सजग प्रहरी के रूप में भूमिका देश को आसान शिकार समझने वालों पर लगाम कसेगी......