
पिछले दिनों मैंने खरीददारों का एक ऐसा मेला देखा जिसमें बिकने वाला अपने ऊपर लगाई जाने वाली राशि को लेकर जबरदस्त उत्साह से भरा हुआ और खुश नजर आ रहा था। यहाँ यह कहना अतिशियोक्ति नहीं होगा कि आदमी को खरीदना और बेचना इस देश में प्राचीनकाल से चला आ रहा है लेकिन बिकने वाले के चेहरे पर मैंने ऐसी खुशी पहले कभी नहीं देखी और न ही सुनी........!
जिस दिन ये सब हो रहा था उस दिन इस देश के एक प्रबुद्ध समाचार चैनल ने बिकने वाले खिलाड़ियों को जो सम्मान दिया था वह मेरे आज तक भी गले नहीं उतर रहा है.... NDTV India ने एक वस्तु की भाँती खिलाड़ी की BASE PRICE और SOLD PRICE कहकर लगने वाली कीमत का हवाला दिया था.....! एक बार को लगा था कि निर्जीव चीज की तरह चौराहे पर खड़ा होकर आदमी बिक रहा है.........
यहाँ चैनल ने कुछ भी गलत नहीं किया, वास्तविकता को जनता के सामने रखा और उचित शब्दों का प्रयोग किया क्योंकि खिलाड़ियों को खरीदने के लिए लगने वाली ये बोली कहीं न कहीं उनके खिलाड़ी होने का कम और लोगों के मनोरंजन के साधन होने का अहसास ज्यादा करा रही थी क्योंकि इस मनोरंजन के जरिये खरीददार को एक मोटी कमाई होती दिख रही थी........
मेरा मानना है कि इस तरह की प्रतियोगिताएं होना बुरी बात नहीं है किन्तु IPL में इतनी भारी मात्रा में धन का अपव्यय करना देश के हितों पर कुठाराघात है.....






