
कोमनवेल्थ खेलों पर हो रही लगातार खींचतान और राजनीती से आप सभी अच्छी तरह वाकिफ हैं , इस आयोजन को लेकर एक-दुसरे के ऊपर आरोप-प्रत्यारोप और इस पर खर्च किये जाने वाले धन को लेकर जो भी तमाशा चल रहा है वह हम सभी की नजर में है। लेकिन यह सब करने वालों ने कभी यह सोचा है क्या, की इस सब से मेरे देश की छवि अंतर्राष्ट्रीय पटल पर कितनी धूमिल हो रही है..........
हमारे लिए बड़े सौभाग्य की बात है की इन खेलों की मेजबानी हम कर रहे हैं। विश्व भर के देश उम्मीद लगाए बैठे रहते हैं की उन्हें इस तरह का मौका मिले और ऐसे अवसर पर हमारे ही लोग इस आयोजन को सफल बनाना तो दूर इसे पूरी तरह बिगाड़ने पर तुले हुए हैं।
मुझे लगता है की इस देश में राजनीती कर रहे लोगों के राजनीतिक और व्यक्तिगत स्वार्थ देश से भी बढ़कर हैं और उन्हें इस बात की कतई परवाह नहीं की विश्व जगत में हमारी कितनी किरकिरी हो रही है......
जरा सोचिये जब राज्यवर्धन राठोड, विजेंद्र सिंह और इसी तरह देश के बहुत से खिलाडी ऐसे आयोजनों के माध्यम से देश में जब पदक लेकर लौटते हैं तो पूरा देश उनकी अगवानी करता हुआ क्यों पलक-पांवड़े बिछा देता है............? और राजनीति करने वाले यही लोग क्यों उनके लिए ढेरों सुविधाओं और इनामों की घोषणा करते हैं............? क्योंकि वो हमारे देश का मान पूरे विश्व में ऊंचा करके आते हैं..........
ये हमारी अंदरूनी बात है की इस आयोजन को लेकर यदि किसी प्रकार से धन के दुरूपयोग, भ्रष्टाचार या अव्यवस्था की बात सामने आती है तो सम्बंधित गुनाहगार या दोषी को सजा अवश्य मिलनी चाहिए, लेकिन इस सब से पहले इस कार्यक्रम की सफलतापूर्वक सम्पन्नता के लिए सभी को मिल-जुलकर प्रयास करना होगा ताकि विश्व पटल पर मेरे देश की जो एक छवि बनी हुई है उसको किसी तरह का कोई आघात न पहुंचे।
मेरी नजर में सबसे बड़े दोषी वो लोग हैं जो इस देश के मान को अघात पहुंचा रहे हैं, उन्हें सबसे पहले दण्डित किया जाना चाहिए तथा उन्हें तब तक प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए, जब तक यह आयोजन पूर्ण रूप से सफलतापूर्वक संपन्न न हो जाए ताकि वे किसी भी रूप में इसकी खिलाफत करने का प्रयास न कर सकें।
इस देश का मान-सम्मान बनाए रखना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है......





